Happy Mahashivratri (महाशिवरात्रि): Shivaratri 2023 Kab hai

Mahashivratri 2023: महाशिवरात्रि (Mahashivratri) प्रसिद्ध हिंदू त्योहार है जो हर साल विनाश और उत्थान के देवता भगवान शिव (Shiv) की श्रद्धा में मनाया जाता है। प्रत्येक चंद्र मास की 13वीं रात और 14वें दिन शिवरात्रि (Shivaratri) मनाई जाती है। फाल्गुन (फाल्गुन) के महीने में शिवरात्रि (Shiv Ratri) मनाई जाती है जो हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना होता है। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का अर्थ है “शिव की महान रात”। यह वसंत ऋतु के आगमन से ठीक पहले आता है, जो आमतौर पर कैलेंडर में फरवरी या मार्च के महीने में होता है। यह पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है और अधिकांश राज्यों में इस दिन छुट्टी होती है इसके अलावा इस दिन मॉरीशस और नेपाल में भी महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) मनाई जाती है।

Mahashivratri Kab Hai (महाशिवरात्रि कब है): शिवरात्रि कब है

Mahashivratri 2023 (महाशिवरात्रि 2023) या Shivratri 2023 (शिवरात्रि 2023) के बारे मे बहुत सारे सवाल है जैसे शिवरात्रि कब है (Shivaratri Kab Hai), Mahashivratri Kab Hai (महाशिवरात्रि कब है), शिवरात्रि कितनी तारीख की है, शिवरात्रि कब की है (Shivaratri Kab ki Hai) इन्ही सब सवालों को जवाब आप यहां देख सकते हैं।

शिवरात्रि 2023 (Shivratri 2023 Mein) में 18 फरवरी, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। (Shivratri Date)

महाशिवरात्रि 2023 शुभ मुहूर्त (Mahashivratri 2023 Shubh Muhurt)

18 फरवरी, शनिवार को शिवरात्रि (Shiv Ratri) सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 2 मार्च, बुधवार को सुबह 10 बजे तक रहेगी.और रात्रि की पूजा का समय सांय 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर रात्रि 12 बजकर 33 मिनट तक होगी. शिवरात्रि (Shivaratri) को की जाने वाली पूजा चार पहर की होती है जो अलग अलग समय अंतराल में होती हैं

महाशिवरात्रि चार पहर की पूजा का समय (Mahashivratri 2023 Char Pahar Puja Timings)

1: पहले पहर की पूजा का समय- 18 फरवरी, शनिवार 2023 शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक. 

2: दूसरे पहर की पूजा का समय- 1 मार्च, मंगलवार रात्रि 9:27 मिनट से 12: 33 मिनट तक. 

3: तीसरे पहर की पूजा का समय- 1 मार्च, मंगलवार रात्रि 12:33 मिनट से सुबह 3 :39 मिनट तक. 

4: चौथे पहर की पूजा का समय- 2 मार्च, बुधवार सुबह 3:39 मिनट से 6:45 मिनट तक. 

व्रत के पारण का शुभ समय- 2 मार्च, बुधवार 2023 को 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. (शिवरात्रि का व्रत कब खोला जाता है)

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है (Mahashivratri Kyu Manaya jata Hai)

बहुत सारे दोस्तों का सवाल है कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है (Mahashivratri Kyu Manaya jata Hai) या महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है तो हम आपको बता दें कि इस दिन शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। शिवभक्त इस दिन शिवजी की शादी का उत्सव मनाते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि को शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था।

महाशिवरात्रि पूजा विधि: महाशिवरात्रि व्रत विधि (vidhi)

  • शिवरात्रि (Shivaratri) को भगवान शिव को मिट्टी या तांबे के लोटे में पानी या दूध भरकर पंचामृत से स्नान कराएं और उसके बाद केसर के 8 लोटे जल अर्पित करें और चंदन का तिलक लगाएं. महाशिवरात्रिके मौके पर पूरी रात्रि bhagwan shiv के सामने दीपक जलाएं रखे.
  • इस दिन चढ़ाने के लिए तीन बेलपत्र, भांग, फूल, धतूरा, तुलसी, चावल, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, आक, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं और इन सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग भगवान शिव के आगे लगाए और फिर प्रसाद को सभी लोगो के बीच बांट दिया जाए।
  • पूजा करते हुए सभी वस्तुएं चढ़ाते हुए शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या “ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः” मंत्र का जाप करें.
  • अगर हो सके तो महाशिवरात्रि को रात्रि जागरण का भी आयोजन करना चाहिए है।

Mahashivratri Vrat Katha: महाशिवरात्रि की कथा

बहुत पहले चित्रभानु अपने परिवार का पेट पालने के लिए शिकार किया करते थे। गरीब होने के कारण वह साहूकारों से कर्ज लेता था, जिसे वह समय पर नहीं चुका पाता था। अपने कर्ज की वसूली के लिए, एक दिन चित्रभानु को साहूकार ने कैद कर लिया, इसलिए चित्रभानु को भूखा-प्यासा रहना पड़ा।

इस बीच, चित्रभानु भगवान शिव की पूजा कर रहे थे। साहूकार ने चित्रभानु को रात के लिए पैसे जमा करने के लिए छोड़ दिया, जिसके बाद चित्रभानु शिकार की तलाश में जंगल में भटकते रहे। देर रात इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन एक भी शिकार नहीं मिला। पास ही एक बेल का पेड़ था जिसके नीचे बैठ गया, उस बेल के पेड़ के नीचे एक शिवलिंग मौजूद था।

चित्रभानु ने शिवलिंग को अनजाने मे बेलपत्र अर्पित किया: चित्रभानु के कारण शिवलिंग पर बेल के पत्ते गिरते रहे। उसके बाद वहां एक गर्भवती मादा रात के समय तालाब के पास पहुंची। चित्रभानु उस गर्भवती हिरण को मारने ही वाला था कि गर्भवती हिरण ने उससे कहा कि वह जल्द ही अपने बच्चे को जन्म देगी। मैं अपने पुत्र को जन्म देकर तुम्हारे पास लौटूंगी, तब तुम मेरा शिकार मत करो। गर्भवती हिरनी के बारे में सुनकर चित्रभानु ने उसे जाने दिया, इसलिए पहला महाशिवरात्रि प्रहर भी बीत गया।

चित्रभानु शिकार की तलाश में थे तभी वहां से एक और हिरणी आई। हिरणी को देखकर चित्रभानु शिकार के लिए तैयार था, जब हिरणी ने उसे बताया कि वह अभी-अभी बाहर आई है और अपने पति की तलाश कर रही है। हिरणी ने उससे वादा किया कि वह अपने पति से मिलेगी और शिकार पर लौट आएगी। चित्रभानु ने उसे जाने दिया, इस प्रकार आखिरी घड़ी भी पार कर ली। चित्रभानु के कारण शिवलिंग पर बेल के पत्ते गिरे, इस प्रकार दूसरे प्रहर की पूजा भी समाप्त हो गई।

कुछ समय बाद वहां से तीसरी हिरणी अपने बच्चों के साथ आई, चित्रभानु फिर से हिरणी के शिकार के लिए तैयार हो गया। हिरणी ने कहा कि वह इन बच्चों को अपने पिता के पास छोड़ कर वापस आएगी। हिरणी की बात सुनकर चित्रभानु ने उसे भी छोड़ दिया। इस तरह चित्रभानु ने पूरा दिन उपवास रखा और रात्रि जागरण किया। 

चित्रभानु अपने कर्ज और परिवार की चिंता में डूबा हुआ था तभी वहां एक हिरण आया। हिरण ने चित्रभानु को देखते हुए कहा कि अगर तुमने तीन हिरणी और उनके बच्चों को मार दिया है तभी तुम मुझे मार सकते हो। और अगर तुमने उनको छोड़ दिया है तो मुझे भी छोड़ दो मैं अपने पूरे परिवार के साथ यहां वापस आ जाऊंगा।

चित्रभानु ने हिरण तो घटित घटना बताई तब हिरण ने जवाब दिया कि वह तीन हिरणियां उसकी पत्नी थीं। अगर तुमने मुझे मार दिया तो वह तीन हिरणी अपना वादा पूरा नहीं कर पाएंगी। मेरा विश्वास करो मैं अपने पूरे परिवार के साथ यहां जल्दी वापस आऊंगा।

हिरण की बात सुनकर चित्रभानु ने उसे जाने दिया। इस तरह चित्रभानु का ह्रदय परिवर्तन हो गया और उसका मन पवित्र हो गया। रात भर चित्रभानु ने भगवान शिव की आराधना की थी जिसके वजह से भगवान शिव उससे प्रसन्न हो गए थे। कुछ देर बाद हिरण अपने पूरे परिवार के साथ चित्रभानु के पास पहुंच गया था।

हिरण और उसके परिवार को देखकर चित्रभानु बहुत खुश हुआ और उसने हिरण के पूरे परिवार को जीवनदान देने का वचन लिया। इस तरह चित्रभानु को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और मरने के बाद उसे शिवलोक में जगह मिली थी।

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  • May Lord Shiva and Mata Parvati shower their blessings on you and your family. Wishing you all a very Happy Mahashivratri!
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  • May the glory of the divine Shiva, remind us of our capabilities and help us attain success. Happy Maha Shivratri!

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  •  Mahashivratri blessings to you and your family. May the almighty Lord Shiva bless you all with good things and perfect health. Mahashivratri ki Hardik shubhkamnaye
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  • May the glory of the divine Shiva, remind us of our capabilities and help us attain success. Jai Shiva Shankar.
  • May the choicest blessings of Lord Shiva bring happiness, peace, good health, wealth, prosperity and harmony to your life. Happy Maha Shivratri.
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