Makar Sankranti 2023: कब है मकर संक्रांति? जानिए तारीख ,समय , तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष मकर सक्रांति 14 जनवरी 2023 शनिवार को पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को मनाया जाएगा. ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। हर वर्ष 14 जनवरी को ही मनाई जाती है और इसके पीछे का कारण सूर्य की गति नियमित होना है । ज्योतिष के अनुसार यह माना जा रहा है कि 14 जनवरी 2023 को दोपहर 2:32 सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा इसका पुण्य पर्व काल 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मकर सक्रांति को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे कि पंजाब में लोहड़ी, केरल में पोंगल, उत्तराखंड में उत्तरायणी, गुजरात में उत्तरायण और कई स्थानों पर खिचड़ी।

मकर सक्रांति 2023 :

मकर सक्रांति दिनांक : 14 जनवरी 2023

मकर सक्रांति तिथि : पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी

मकर सक्रांति दिन : शुक्रवार

मकर सक्रांति राशिफल : मेष राशि, कर्क राशि, मिथुन राशि, सिंह राशि, वृश्चिक राशि

मकर सक्रांति पुण्य काल : दोपहर 2:43 से शाम 5:45 तक

मकर सक्रांति पुण्य काल अवधि : 3 घंटे 2 मिनट

मकर सक्रांति महा पुण्य काल : दोपहर 2:43 से रात्रि 4:28 तक

मकर सक्रांति महा पुण्य काल अवधि : 1 घंटा 45 मिनट

मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त : सुबह 5:38 से 6:26 तक, सुबह 11:46 से दोपहर 12:29 तक, दोपहर 1:54 से 2:37

मकर सक्रांति पर्व को मनाये जाने वाले उत्सव :

भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति के त्योहार के अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। इस पर्व पर सूर्य भगवान की उपासना की जाती है और दान-दक्षिणा दी जाती है। उत्तर प्रदेश में मकर सक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान करते हैं। इलाहाबाद के प्रयाग में माघ मेला इसी दिन शुरू होता है। पंजाब में, स्थानीय लोग मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर लोहड़ी जलाते है और पवित्र अग्नि के चारों ओर चावल और मिठाई फेंक कर पूजा करते हैं और इसके बाद लोहड़ी के चारों ओर ‘भांगड़ा’ नृत्य होता है। गुजरात में इस दिन पतंगबाजी का महोत्सव मनाया जाता है।

मकर सक्रांति के इस पावन अवसर पर परिवार के सदस्य एक दूसरे को मिठाई और उपहार का आदान प्रदान करते हैं। महाराष्ट्र में मकर सक्रांति के दिन गुड व तिल से बनी मिठाईयों का भोग करते हैं। इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है इसलिए घर की शादीशुदा महिलाएं नए बर्तन की खरीदती है। कई स्थानों पर मकर सक्रांति को संकरात भी बोला जाता है। प्रयागराज और गंगा नदी जैसी पवित्र नदियों को मकर सक्रांति बनाने की महत्वपूर्ण जगह माना जाता है। मकर सक्रांति प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को ही बनाई जाती है इसलिए पिछले त्योहार 14 जनवरी 2021 और 14 जनवरी 2020 को मनाई गई थी।

मकर सक्रांति/संकरात/लोहड़ी/पोंगल का महत्व (makar Sankranti/Sankrant/Lohri/Pongal) :

मकर संक्रांति को किसानों का प्रमुख पर्व माना जाता है।शास्त्रों के अनुसार सूर्य को संसार का आत्मा माना गया है. इस दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं. इसी दिन ही सूर्य कि उत्तरायण गति भी प्रारंभ हो जाती है इसी कारण इसे उतरानी शास्त्रों के अनुसार यह माना जाता हैं कि पौष मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर यह पर्व मनाया जाता है।

यह एक प्रसिद्ध हिंदू त्योहार है, जिसे भारत के साथ कई अन्य देशों में भी इसे मनाया जाता है। इस त्योहार को सर्दी आने का सूचक माना जाता है और साथ ही इस पर्व के बाद माना जाता है कि दिन छोटे हो जाते और रात बड़ी हो जाती है। मकर सक्रांति को साल का पहला त्योहार माना जाता हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार, मकर सक्रांति के दिन भगवान आशुतोष ने भगवान श्री हरि विष्णु को आत्मज्ञान का दान दिया था. महाभारत की कथा के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपने शरीर का त्याग मकर संक्रांति पर किया था. इसके अलावा मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन उत्तरायण के वक्त किया गया दान सौ गुना अधिक फल देता है.

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